क्या उत्तर प्रदेश में भी विपक्षी एकता को झटका देगी बीजेपी ?

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न्यूज़ डेस्क 

महाराष्ट्र में पिछले साल भर से जो हो रहा है उसके बाद इस बात के कयास तेज हो गए हैं कि यूपी में भी कोई बड़ा खेल बीजेपी कर सकती है। इसके साथ ही बिहार में भी बीजेपी कोई बड़ा ऑपरेशन चला  सकती है ताकि नीतीश कुमार की पूरी राजनीति को ही ध्वस्त कर दिया जाए। हालांकि इस तरह की ज्यादातर खबरे प्लांट की जा रही है और बीजेपी से जुडी मीडिया इस तरह की खबरे ज्यादा चला भी रही है। लेकिन जिस तरह से बीजेपी ने महाराष्ट्र में खेल किया है उससे साफ़ हो गया है कि अगर उसे सत्ता में बने रहना है तो यूपी और बिहार में भी खेल करना होगा।          
    देखना यह है कि महाराष्ट्र की  तरह ही यूपी और बिहार में वह सपा और जदयू के तोड़ पाती है नहीं। लेकिन बीजेपी की निगाह कुछ और दलों पर भी है। यूपी में बीजेपी चाहती है कि कुछ दल उसके साथ आ जाये और बड़ी दल को तोड़ दिया जाए। यूपी में बीजेपी की नजर ओमप्रकाश राजभर पर है। राजभर बीजेपी के साथ जाने को तैयार भी हैं लेकिन बीजेपी चाहती है कि पश्चिमी यूपी में पार्टी को मजबूत करने के लिए उसे रालोद का सहयोग मिल जाए। बीजेपी अब जयंत चौधरी को अपने साथ मिलाने को तैयार हैं। खबर  कि जयंत के साथ बीजेपी के कुछ नेताओं की बैठक भी हुई है लेकिन अभी तक खास सफलता नहीं मिली है।            
   बीजेपी समर्थित दलों का दावा है कि जो एनसीपी   साथ हुआ वो यूपी में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ भी हो सकता है। महाराष्ट्र की तर्ज पर बीजेपी यूपी में विपक्षी दलों की एकता को झटका देने की कोशिशों में जुटी हुई है। एक तरफ जहां चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर  के एक बार फिर बीजेपी के साथ जाने की अटकलें तेज हो गई हैं तो वहीं रालोद को भी साथ लाने की कवायद की जा रही है।                 दरअसल, उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने सभी 80 लोकसभा सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है।  पूर्वांचल में पहले से ही बीजेपी के साथ अनुप्रिया पटेल की अपना दल और संजय निषाद की निषाद पार्टी का गठबंधन है। वहीं चर्चा है कि 2024 से पहले ओम प्रकाश राजभर फिर से बीजेपी के साथ आ सकते हैं। वो दिल्ली में दो बार अमित शाह से मुलाकात भी कर चुके हैं। अगर ऐसा हुआ तो पूर्वांचल में बीजेपी काफी मजबूत स्थिति में आ जाएगी, ऐसे में बीजेपी के मिशन 80 के सपने को रालोद की वजह से पश्चिमी यूपी में झटका लग सकता है।              
     निकाय चुनाव के दौरान सपा और रालोद गठबंधन में खींचतान की खबरें भी सामने आईं थी, ऐसे में बीजेपी इस मौके को अपने हाथ से जाने देना नहीं चाहेगी। पश्चिमी यूपी में बीजेपी का किसी के साथ गठबंधन नहीं है, यहां वो अकेले विपक्ष का मुकाबला कर रही है। मुरादाबाद में बीजेपी की स्थिति कमजोर है. 2019 में भी इस इलाके में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। खबरों की मानें तो बीजेपी ने ऑपरेशन रालोद शुरू भी कर दिया है, हालांकि इसे लेकर अभी ज्यादा हलचल देखने को नहीं मिल रही है। 
              पश्चिमी यूपी में बीजेपी के लिए चिंता की एक वजह ये भी है कि खतौली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में रालोद ने ये सीट बीजेपी से छीन ली थी। ये बात अलग है कि बीजेपी ने आजमगढ़ के गढ़ में घुसकर सपा को मात दी है। निकाय चुनाव में भी बीजेपी को पहले से ज्यादा सीट मिली, पर जाटलैंड में पैर जमाने में बीजेपी को अब भी मशक्कत करनी पड़ रही है।
              यूपी में विपक्षी एकता को लेकर सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि 23 जून को पटना में हुई बैठक में सपा के दो सहयोगी अपना दल कमेरावादी से पल्लवी पटेल और जयंत चौधरी शामिल नहीं हुए थे। जयंत ने इसके पीछे पहले से निर्धारित कार्यक्रम को वजह बताया था। अगर रालोद बीजेपी के साथ आ जाती है तो यूपी में बीजेपी के विजय रथ को रोकना विपक्षी दलों के लिए मुश्किल हो जाएगा। 

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