बाबा मंदिर में बदल गई सारी व्यवस्थाएं, अरघा माध्यम ही रहा जलार्पण,₹500 में शीघ्रदर्शनम

0
517

बीरेंद्र कुमार झा

झारखंड के देवघर में स्थित बाबाधाम और बासुकीनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। देवघर स्थित शिवलिंग को मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में आकर भक्त जो भी मांगता है, भगवान भोलेनाथ उसकी मुराद जरूर पूरी करते हैं। देवघर में हर साल 1 महीने का राजकीय श्रावणी मेला लगता है, जिसमें देश के कोने कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा वैद्यनाथ पर जलाभिषेक करने आते हैं।अब विदेशों से भी भक्त सावन में यहां आने लगे हैं। इस साल मलमास होने के कारण श्रावणी मेला 2 महीने का होगा। बाबा धाम की तरह दुमका के बासुकीनाथ मंदिर में भी राजकीय मेला का आयोजन किया जाता है।कहा जाता है कि देवघर आने वाले श्रद्धालु बासुकीनाथ आकर जब पूजा कर लेते हैं तभी उनकी पूजा पूरी मानी जाती है।

अरघा से हो रहा जलार्पण

विश्व प्रसिद्ध झारखंड का राजकीय श्रावणी मेला शुरू हो गया है। इसके साथ ही पूरे मेले तक बाबा मंदिर में सारी व्यवस्थाएं बदल गई हैं। कांवरियों को सुलभ जलार्पण कराने के उद्देश्य बाबा मंदिर में अरघा के माध्यम से जलार्पण कराया जा रहा है,वहीं मंदिर अब हर दिन मेले के दौरान सुबह 3:05 बजे खुलेगा। पट खुलते ही पहले 15 मिनट तक कांचा जल पूजा और उसके बाद करीब 40 मिनट तक सरकारी पूजा होगी। इसके बाद सुबह 3:45 बजे से आम कांवरियों के लिए अरघा के माध्यम से पूजा प्रारंभ हो जाएगा। वही शीघ्र दरसानम के लिए गेट सुबह 6:00 बजे से खोला जाएगा।

शिव और शक्ति का सानिध्य वाला एकमात्र मंदिर है बाबा धाम

झारखंड के देवघर स्थित बाबा धाम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसे मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में आकर भक्त जो भी मांगता है, भगवान भोलेनाथ उसकी मुराद जरूर पूरी करते हैं।यह मंदिर कई मायने में अन्य ज्योतिर्लिंगों में खास है। यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां शिव के संग शक्ति भी विराजमान है। यानी शिव और पार्वती दोनों का मंदिर बाबा धाम में है ,इसलिए बाबा धाम को शक्तिपीठ भी कहा जाता है।श्रावण माह में बिहार के भागलपुर जिला स्थित सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से भक्त गंगाजल उठाते हैं और बोल बम बोल बम करते हुए 107 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर पहुंचकर बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान वे सात्विक भोजन करते हैं और बाबा की भक्ति में दिन रात बिताते हैं।देवघर में हर साल 1 महीने का श्रावणी मेला लगता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने आते हैं ।मलमास या अधिकमास होने पर इस वर्ष श्रावणी मेला 2 महीने का हो गया है।

बाबा का फौजदारी दरबार है बासुकीनाथ

बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण करने आए आने वाले कांवरियों में से ज्यादातर कांवरिया दुमका के बासुकीनाथ आकर नागेश लिंग पर भी जलार्पण करते हैं। बासुकीनाथ का नागेश लिंग भी द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इन्हें बाबा भोलेनाथ का फौजदारी दरबार माना जाता है।लोगों की ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की बाबा वासुकीनाथ तुरंत ही मनोकामना पूर्ण कर देते हैं ,यही कारण है कि विभिन्न असाध्य रोगों और मानसिक संताप को को दूर करने के लिए भक्तगण यहां आकर धरना पर बैठते हैं और दिन रात बाबा बासुकीनाथ की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा करने पर बाबा बासुकीनाथ शीघ्र ही उनके कष्टों को हर कर उन्हें खुशियां प्रदान करते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here