आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने बदले 4 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष

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बीरेंद्र कुमार झा

इस वर्ष के अंत तक होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ- साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बीजेपी ने अब संगठन के पेंच कसने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में मंगलवार को बीजेपी ने चार राज्यों में अपने प्रदेश अध्यक्ष बदल दिए हैं। पंजाब में उसने सुनील जाखड़ को पार्टी की कमान सौंपी है ।इसके अलावा तेलंगाना में केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी को , आंध्र प्रदेश में डी पुरंदेश्वरी और झारखंड में बाबूलाल मरांडी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

मंत्रिमंडल में भी ही सकता है बदलाव

बीजेपी ने जिन चार नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है उनमें से जी किशन रेड्डी भारत सरकार में पर्यटन मंत्री हैं ।ऐसे में इस बात के भी कयास अब तेज हो गए हैं कि जल्दी ही मोदी सरकार के कैबिनेट में भी फेरबदल होगा ।आमतौर पर बीजेपी एक व्यक्ति एक पद की नीति पर काम करती रही है।ऐसे में जी किशन रेड्डी को मंत्री पद से हटाया जा सकता है, ताकि वह तेलंगाना में पूरा समय दे सकें ।

कांग्रेस से आए और बीजेपी के बागी को भी बनाया गया प्रदेश अध्यक्ष

बीजेपी द्वारा 4 राज्यों के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष की बात करें तो इसमें से दो नेता का संबंध पूर्व में कांग्रेस से रहा है,जबकि एक ने पार्टी से बगावत कर दिया था और लंबे समय तक बीजेपी से अलग होकर एक क्षेत्रीय पार्टी के अध्यक्ष के रूप में चुनौती देते रहे थे।

बीजेपी द्वारा कांग्रेस से आए नेताओं को जिन्हें वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है उसमें आंध्र प्रदेश की अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी और दूसरे पंजाब के अध्यक्ष सुनील जाखड़ शामिल हैं।आंध्र प्रदेश की अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी ने मार्च 2014 में कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था, जबकि सुनील जाखड़ तो दशकों तक कांग्रेस में रहने के बाद बीते साल ही कांग्रेस से रिश्ता तोड़ कर बीजेपी में आए थे। बीजेपी द्वारा बागी रहे जिस बीजेपी नेता को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है वे हैं बाबूलाल मरांडी। बीजेपी ने दुबारा बीजेपी में शामिल होने पर झारखंड में विपक्ष के नेता बनाया है,हालांकि विधान सभा अध्यक्ष ने उसे मान्यता नहीं दिया है और इनका मामला अभी विधान सभा अध्यक्ष के कोर्ट में चल रहा है। पूर्व में एक बार इन्होंने बीजेपी का साथ छोड़कर एक क्षेत्रीय पार्टी झारखंड विकास मोर्चा बनाई थी।

अलग पार्टी भी बना चुके हैं बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी चार बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं और झारखंड के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी को दुमका में शिकस्त देकर इन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थी और तब अटल बिहारी बाजपेई के मंत्रिमंडल में इन्हें वन एवं पर्यावरण मंत्री का पद मिला था। झारखंड के 2000 में बिहार से बढ़कर अलग राज्य बनने पर बीजेपी ने इन्हें झारखंड का पहला मुख्यमंत्री भी बनाया था। राज्य में 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति को लागू करने के प्रयास के कारण इन्हें काफी बदनामी झेलनी पड़ी थी और इसके बाद बीजेपी ने सत्ता भी इनके हाथ से छीन कर पार्टी के दूसरे नेता अर्जुन मुंडा को दे दिया था। 2005 ईस्वी में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के द्वारा इन्हें झारखंड के मुख्यमंत्री बनाए जाने की जगह अर्जुन मुंडा को जब मुख्यमंत्री बना दिया गया तो ये पार्टी से खासे नाराज चलने लगे और अंततः उन्होंने बीजेपी से बगावत कर अपनी नई पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का गठन कर लिया। इसके बाद ये लगातार विपक्षी गठबंधन के सहयोगी रहे और 2019 ईस्वी के विधानसभा चुनाव के बाद इन्होंने फिर से बीजेपी में वापसी की है।

 

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