बीरेंद्र कुमार झा
समान नागरिक संहिता पर छिड़ी बहस अब जल्द ही संसद में पहुंच सकती है।कानूनी मंत्रालय मामलों की संसदीय समिति ने इस मसले पर चर्चा के लिए 3 जुलाई को विधि आयोग और कानून मंत्रालय के अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है। दो चरणों में यह मीटिंग की जाएगी और दोनों पक्षों के विचार समान नागरिक संहिता पर जाने जाएंगे। 14 जून को विधि आयोग ने एक नोटिस जारी किया था जिसमें संबंधित पक्षों से समान नागरिक संहिता को लेकर उनके विचार मांगे गए थे। इसके लिए 1 महीने का समय दिया गया है।चर्चा है कि जुलाई के तीसरे सप्ताह में मानसून सत्र शुरू होगा और उस दौरान यूसीसी पर बिल पेश हो सकता है।
स्टैंडिंग कमिटी में जा सकता है यूसीसी का यह मसला
कानूनी मामलों की संसदीय समिति की अध्यक्षता बीजेपी के नेता सुशील मोदी के पास है।इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं।चर्चा यहां तक है कि मॉनसून सेशन में सरकार समान नागरिक संहिता पर विधेयक को संसद में पेश कर सकती और फिर इसे स्टैंडिंग कमिटी को विचार के लिए सौंपा जा सकता है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल में बीजेपी के कार्यक्रम में इस पर विस्तार से टिप्पणी की थी।उन्होंने कहा था कि कुछ लोग एक ही वर्ग को भड़का कर समान नागरिक संहिता का विरोध कर रहे हैं।
एक देश एक कानून
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में बीजेपी की एक सभा में यूसीसी का विरोध करने वालों पर तेज कसते हुए कहा था कि आखिर एक देश में दो तरह के कानून कैसे हो सकते हैं ? एक ही परिवार में 2 लोगों के लिए अलग-अलग कानून कैसे हो सकता है? प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद से ही इस मसले हलचल तेज हैं।यहां तक कि रातों-रात ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मसले पर एक मीटिंग बुला ली थी। इस बैठक में फैसला हुआ था कि विधि आयोग की ओर से मांगे गए सुझाव पर मजबूती से अपना पक्ष रखा जाएगा।गौरतलब है कि बीजेपी इस मसले पर शुरू से ही आक्रामक रही है। 1967 में पहली बार भारतीय जनसंघ ने समान नागरिक संहिता को अपने घोषणापत्र का हिस्सा बनाया था और तब से आज तक वह या बीजेपी इस मसले को अपना सैद्धांतिक पक्ष बताती रही है।

