न्यूज़ डेस्क
भविष्य में पकिस्तान का क्या हश्र होगा यह तो कोई नहीं जानता लेकिन भारत से मुकाबला करने के लिए पकिस्तान चीन के सहयोग से परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगा रहा है। पकिस्तान का यह ऊर्जा संयंत्र सीमा के नजदीक लगने जा रहा है इसलिए भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कंगाल हो चूका पकिस्तान आखिर इतना बड़ा कदम क्यों उठा रहा है ?
जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच चश्मा 5 (सी-5) परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। 4.8 अरब डॉलर की लागत और 1200 मेगावाट क्षमता का ये परमाणु ऊर्जा प्लांट पंजाब के मियांवाली जिले में चश्मा परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट का ही पांचवां चरण होगा। यह स्थान भारत की सीमा से बहुत दूर नहीं है।
इस प्रोजेक्ट की खास बात ये है कि ये पाकिस्तान का अब तक सबसे महंगा परमाणु प्रोजेक्ट होने जा रहा है। मुश्किल समय में इस प्रोजेक्ट को पाकिस्तान में लाने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जिन शब्दों में चीन का ‘अहसान’ जताया है, उससे साफ है कि इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान को चीन से आर्थिक मदद मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट सी-5 पर 2016-17 में चर्चा शुरू हुई थी, लेकिन बाद में ये ठंडे बस्ते में चला गया था। हालांकि पीएम शरीफ ने एमओयू साइन किए जाने के मौके पर कहा, आशा है कि इस प्रोजेक्ट पर बिना किसी देरी के काम शुरू किया जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारी दोस्ती हिमालय से ऊंची है, गहरे समुद्र से भी गहरी है, चीनी और शहद से भी मीठी है, और लोहे और स्टील से भी मजबूत है।’ शरीफ ने कहा कि, राष्ट्रपति जिनपिंग ने पाकिस्तान और चीन की साझेदारी को आयरन ब्रदर्स कहकर संबोधित किया है।
शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की नौवीं समीक्षा के सभी नियमों और शर्तों को पूरा करने के बावजूद हमें लोन देने में भारी देरी की गई है। इस मुश्किल समय में चीन, एक बार फिर हमारी मदद और बचाव के लिए आया है। शरीफ ने कहा, यह दोस्ती है। अपना वही जो आवे काम। शरीफ ने कहा कि, चीन की इस मदद के लिए उनके पास आभार व्यक्त करने के लिए शब्दों की कमी थी। उन्होंने कहा, हम राष्ट्रपति शी जिनपिंग, चीनी नेतृत्व और चीनी वित्त मंत्री के प्रति बहुत अहसानमंद हैं। इस मौके पर चीन के ओर से ‘चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन ओवरसीज लिमिटेड’ के अध्यक्ष वांग यांगी और चीनी मामलों के प्रभारी पैंग चुंक्सुइ भी मौजूद रहे।
पाकिस्तान के पास फिलहाल छह ऑपरेशनल परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं है। इनमें से दो के-2 और के-3 कराची के पास मौजूद हैं। इनके विकास में पाकिस्तान को फ्रांस का सहयोग मिला था। जबकि चार सी-1, सी-2, सी-3 और सी-4 पंजाब के मियांवाली जिले के चश्मा नामक क्षेत्र में स्थित हैं। ये सभी चीन के सहयोग से ही बने हैं। इस तरह सी-5 पाकिस्तान का सातवां परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट है।
पाकिस्तान और चीन के बीच इस बड़ी परमाणु डील के समझौते की घोषणा तब की गई है जब दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश और भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी नए आयाम छू रही है। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रक्षा सौदे होना तय माना जा रहा है। उस दौरान कमोबेश सेना से शासित चीन और पाकिस्तान के बीच ये परमाणु समझौता होना अपने आप में कई अहम संदेश देता है। गौरतलब है कि बुधवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तानाशाह कहकर संबोधित किया है।

