अखिलेश अखिल
बिहार में बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। आज जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा यानी हम ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व देश के गृह मंत्री अमित शाह से लगभग पौन घंटे की मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और पूर्व मंत्री संतोष कुमार सुमन ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री व बिहार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नित्यानंद राय के सामने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए में शामिल होने की घोषणा की। अभी सप्ताह भर पहले महागठबंधन में शामिल और नीतीश सरकार में मंत्री रहे जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन ने इस्तीफा दे दे दिया था। तभी से यह कयास लगाया जा रहा था कि मांझी की पार्टी हम एनडीए के साथ जा सकती है। खबर के मुताबिक बीजेपी ने मांझी की पार्टी को गया से एक सीट देने का वादा किया है। कहा जा रहा है कि मांझी के बीजेपी के साथ चले जाने से नीतीश कुमार की राजनीति को थोड़ा झटका लग सकता है।
बेटे के इस्तीफे के बाद जीतन राम मांझी ने साफ बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हम का जदयू में विलय चाहते थे, लेकिन जब यह पार्टी महागठबंधन में शामिल नहीं थी तो किसी दल के अंदर विलय का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।
23 जून को पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पूरे देश से भाजपा विरोधी दलों के जुटान की तैयारी के बीच जब पिछले हफ्ते हम के इकलौते मंत्री संतोष सुमन ने नीतीश कुमार मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया तो चार घंटे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वीकार कर लिया। उन चार घंटों के दौरान मुख्यमंत्री आवास में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह समेत कई मंत्री मौजूद रहे।
इसके बाद नीतीश कैबिनेट की बैठक हुई और फिर अगले दिन मंत्रिमंडल के लिए संतोष सुमन की जगह नए चेहरे रत्नेश सदा का नाम जाहिर कर दिया गया। बाकी दलों के कोटे को छोड़ जदयू के इकलौते मंत्री का शपथ ग्रहण करा राजभवन से निकलने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को स्पष्ट तौर पर भाजपा का मुखबिर करार दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने जीतन राम मांझी से कहा था कि वह अपनी पार्टी हम का जदयू में विलय कर लें या अलग हो जाएं, क्योंकि एक अलग दल के रूप में हमारे साथ रहते तो भाजपा को सूचना पहुंचाते रहते। देश की विपक्षी पार्टियों की पटना में बैठक में भी वह बतौर अलग दल शामिल होना चाहते थे। जब यह बात सभी को मालूम है कि वह भाजपा के नेताओं से मिल रहे थे तो साथ रखना मुश्किल था। इसलिए विलय या अलग होने की बात कही तो वे अलग हो गए। विपक्षी दलों की बैठक में सबलोग अपनी-अपनी पार्टी की बात करते और अगर ये लोग साथ रहते तो बैठक में जो कुछ भी बातें होती वो सारी बातें भाजपा को खबर हो जाती।
जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का साथ छोड़ने वाले दूसरे ‘राम’ हैं। इससे पहले, नीतीश के वर्षों तक राजदार और जदयू में राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने नीतीश कुमार का साथ छोड़ा था। रामचंद्र प्रसाद सिंह, यानी आरसीपी सिंह पर भी नीतीश की पार्टी ने यही आरोप लगाया था कि वह पार्टी में रहकर भाजपा के लिए काम कर रहे थे।

