न्यूज़ डेस्क
समय के साथ ही विदेश नीति भी बदल जाती है। चीन को लेकर अमेरिका का रुख अब बदल गया है और भारत को लेकर भी अमेरिका पूरी तरह से बदलने को तैयार है। रुख बदलने का यह सारा खेल व्यापार को लेकर हो रहा है। अमेरिका को लग रहा है कि अभी भारत सम्बन्ध मजबूत करना उसकी पहली जरूररत है और ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका के हाथ से बहुत कुछ निकल जाएगा।
ज़रा खेल देखिये। अमरीका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन 18 जून को चीन के दौरे पर राजधानी बीज़िंग पहुंचे। अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान ब्लिंकन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग विदेश मंत्री किन गांग और डिप्लोमैट वांग यी से मुलाकात की। ब्लिंकन का यह चीन दौरा अमरीका और चीन के संबंधों में सुधार के लिए काफी अहम था। 2018 के बाद से यह पहला मौका है जब किसी हाई लेवल अमरीकी अधिकारी ने चीन का दौरा किया हो। यानी कि करीब 5 साल बाद किसी हाई लेवल अमरीकी अधिकारी ने चीन का दौरा किया था। ब्लिंकन के साथ ही जिनपिंग ने भी इस दौरे के दौरान दोनों पक्षों में सकारात्मक वार्ता के बारे में जानकारी दी थी। ऐसे में लग रहा था कि आने वाले समय में अमरीका और चीन के संबंधों में सुधार देखने को मिलेगा। पर हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति ने एक बड़ी बात कह दी है।
ब्लिंकन की यात्रा को अभी दो दिन ही हुए हैं और अमरीका के सुर बदल गए हैं। हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चाइनीज़ राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए एक बड़ी बात कह दी है। बाइडन ने जिनपिंग की तुलना तानाशाहों से करते हुए उन्हें एक तानाशाह बता दिया है। बाइडन ने कहा, “जिनपिंग फरवरी में एक घटना पर नाराज हो गए थे जब एक चाइनीज़ स्पाई बैलून अमरीका के ऊपर उड़ता पाया गया था और उसे अमरीकी सेना के फाइटर जेट ने मार गिराया था। तानाशाह जिनपिंग के लिए यह एक शर्मिंदगी वाली बात है।”
बाइडन के बयान पर चीन की तरफ से पलटवार किया गया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ यिंग ने इस बारे में बयान देते हुए कहा, “अमेरिकी पक्ष द्वारा इस तरह की टिप्पणी बेहद हास्यास्पद और गैर जिम्मेदाराना है। अमेरिका गंभीर रूप से बुनियादी तथ्यों, डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल और चीन की राजनीतिक गरिमा का उल्लंघन करता है। अमेरिका की तरफ से यह टिप्पणी खुले तौर पर राजनीति उकसावा है।”
अमरीका के सुर बदलना एक इत्तेफाक मात्र नहीं है। दो दिन पहले ब्लिंकन के अमरीका दौरे के बाद जहाँ लग रहा था कि अमरीका आगे बढ़कर चीन से संबंधों को सुधारने की पहल कर रहा है, दो दिन में ही अमरीका के सुर बदल गए हैं। पर क्यों? जवाब है भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका स्टेट विज़िट। पीएम मोदी किसी सामान्य अमरीका दौरे पर नहीं, बल्कि स्टेट विज़िट पर हैं। यानी कि राजकीय दौरा। स्टेट विज़िट पर खास आमंत्रण मिलने पर ही जाया जाता है और यह हर किसी को नहीं दिया जाता है। स्टेट विज़िट का आमंत्रण सिर्फ उन्हीं देशों के राजनेताओं को दिया जाता है जिन्हें वो देश अपना करीबी सहयोगी और मित्र मानता है।
भारत और चीन के संबंधों में एलएसी को लेकर चल रही खटास भी जगजाहिर है। ऐसे में पीएम मोदी की अमरीका स्टेट विज़िट के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति बाइडन का चाइनीज़ राष्ट्रपति जिनपिंग को तानाशाह बताना इस बात को दर्शाता है कि अमरीका भारत को एक करीबी मित्र और सहयोगी के तौर पर देखता है और भारत-चीन विवाद पर पूरी तरह से भारत के साथ है।

