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क्या इस मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता लागू हो जायेगी ? जानिए क्या है सरकार की तैयारी !

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अखिलेश अखिल
बीजेपी को लग रहा है कि समान नागरिक संहिता के जरिए वह वोट को गोलबंद कर सकती है। बीजेपी को यह भी लग रहा है कि इस कानून का जितना विपक्षी पार्टी विरोध करेंगी बीजेपी को लाभ होगा क्योंकि हिंदी समाज इस मसले पर गोलबंद हो जाएगा । ऐसा संभव भी है और नही भी । लेकिन बीजेपी की एक दूसरी चिंता भी है । पांच राज्यों में चुनाव है और फिर लोकसभा चुनाव । वह चाहती है कि चुनाव से पहले यह काम हो जाए। इसके लिए मानसून सत्र में इसे पास कराने की तैयारी है । उससे पहले लोगों से रेस ली जा रही है। विधि आयोग इस पर काम भी कर रहा है ।

बता दें कि यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा प्रावधान होगा, जिसमें देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होंगे। फिर वह किसी धर्म, जाति या समुदाय या पंथ से क्यों न हो। इसमें शादी, तलाक, बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया और संपत्ति के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक सामान कानून लागू होगा। समान नागरिक संहिता को पंथनिरपेक्ष कानून भी कहा जाता है जो देश के सभी धर्मों के लोगों के लिए समान रूप से लागू होता है।

इसके जरिए हर प्रकार के धर्म को मानने वालों के लिए सामान कानून का ही पालन करना पड़ेगा। हमारे संविधान में अब तक अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं, जो UCC लागू होने के बाद खत्म हो जाएंगे। इसमें महिलाओं और पुरुषों को भी समान अधिकार मिलेंगे। बता दें कि मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय का पर्सनल लॉ है जबकि हिन्दू सिविल कोड के तहत हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग आते हैं।

बता दें कि राज्यसभा से बीजेपी सांसद किरोणी लाल मीणा संसद में यूसीसी कोड के लिए प्राइवेट मेंबर बिल काफी पहले प्रपोज कर चुके हैं। अगर यह बिल इस बार के मानसून सेशन में चर्चा के लिए रखा जाता है और यह संसद के दोनों सदनों से पास हो जाता है तो यह कानून बन जाएगा। जिसकी संभावना प्रबल दिख रही है। मीणा के द्वारा प्रस्तावित बिल अगर आगे लागू किया जाता है तो सभी धर्मो के लोगों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार, एडॉप्शन, गार्जियनशिप और जमीन व संपत्ति के बंटवारे के लागू होगा। पहले ये अगल-अलग धर्मों के लिए अलग कानून था, जिसकी वजह से कई निर्णयों को लेने में काफी दिक्कतें आती हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया है की यूसीसी ऐसा हो जिसमें महिलाओं और पुरुषों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न रहे। सभी धार्मिक आस्थाओं, मान्यताओं और भावनाओं का आदर बना रहे। संबंध विच्छेद यानी तलाक के मामलों में बच्चों के अधिकार सुनिश्चित रखे जाएं, ताकि उसके भविष्य से खिलवाड़ न हो। कोड अधिकतम स्वीकार्यता वाला हो यानी सब लोगों की मंजूरी इसमें शामिल हो और अंत में संविधान की हर कसौटियों पर खरा हो।

अब सवाल उठता है कि यूसीसी लागू होने से भाजपा को क्या लाभ मिलेगा ? तो बता दें कि यूसीसी का मुद्दा भाजपा सरकार के लिए जनसंघ के जमाने से मुख्य मुद्दा रहा है। लंबे समय तक जनसंघ के नेताओं ने भी देश में यूसीसी लागू करने की मांग की थी। ये मुद्दा तभी से चला आ रहा है। 2014 और फिर 2019 के चुनाव में भी भाजपा ने इसे जोरशोर से उठाया था।

पिछले नौ साल के अंदर भाजपा की केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए। राम मंदिर का निर्माण हो या तीन तलाक पर कानून बनाने का मसला। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का कदम। अब भाजपा ने जो तीन मुख्य प्रतिज्ञा की थी, उसमे से सिर्फ यूसीसी लागू करना ही बच गया है। अगर यह लागू हो जाता है तो बीजेपी इसे प्रचारित करेगी कि वह जो कहती है वही करती है ।बीजेपी को इससे लाभ हो मिलेगा ।

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