न्यूज़ डेस्क
कर्नाटक कैबिनेट ने गुरुवार को पिछली भाजपा सरकार द्वारा पेश किए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने का फैसला किया है। सरकार आगामी 3 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस संबंध में एक विधेयक पेश करेगी। साथ ही कैबिनेट ने केबी हेडगेवार से जुड़ा चैप्टर कर्नाटक के पाठ्यक्रम से बाहर करने के फैसले को भी मंजूरी दी। सबसे बड़ी बात है कि आज की बैठक में हेडगेवार जो संघ के संस्थापक रहे हैं को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। इसके साथ तमाम साक्षिण पंथी लोगों को भी पुस्तकों से हटाने का फैसला हो गया है। कैबिनेट ने स्कूलों और कॉलेजों में प्रेयर के साथ संविधान की प्रस्तावना को पढ़ना अनिवार्य करने का फैसला किया है।
कैबिनेट ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और हिंदुत्व विचारक वी डी सावरकर सहित अन्य अध्यायों को हटाकर वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए राज्य में कक्षा छह से दस तक की कन्नड़ और सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के पुनरीक्षण को मंजूरी दे दी। इसमें सावित्रीबाई फुले, इंदिरा गांधी को नेहरू के पत्रों और बीआर अंबेडकर पर कविता पर अध्याय जोड़ने और पिछली भाजपा सरकार द्वारा लाए गए परिवर्तनों को दूर करने पर भी सहमति व्यक्त की है।
धर्मांतरण विरोधी विधेयक को कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार संरक्षण विधेयक, 2021 के रूप में भी जाना जाता है, जिसे कर्नाटक विधानसभा में दिसंबर 2021 में लाया गया था तथा कांग्रेस के विरोध के बावजूद 2022 में लागू हुआ। इसका उद्देश्य ‘लालच’, ‘दबाव’, ‘जबरदस्ती’, ‘कपटपूर्ण साधन’ और ‘सामूहिक धर्मांतरण’ के माध्यम से धर्मांतरण को रोकना था।
इसमें 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ तीन से पांच साल की कैद का प्रस्ताव दिया, जबकि नाबालिगों, महिलाओं, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के संबंध में प्रावधानों के उल्लंघन के लिए, अपराधियों को तीन से 10 साल की कैद और 50,000 रुपये से कम का जुर्माना नहीं देना होगा।
कांग्रेस नेताओं और अन्य विपक्षी दलों ने इस कानून की आलोचना की, जिसमें अन्य बातों के अलावा, “अवैध धर्मांतरण” करने वाले किसी भी व्यक्ति पर तीन से 10 साल की जेल की सजा और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
बता दें कि राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में भाजपा के सत्ता में रहने के दौरान स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों को पूर्ववत करने का वादा किया था, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को खत्म करने का भी वादा किया था।

