अशांत मणिपुर में केंद्र के प्रयासों को लगा झटका ,कुकी जनजाति शांति समिति से हुई अलग 

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न्यूज़ डेस्क 

अशांत मणिपुर की हालत पहले से भी ज्यादा ख़राब होती जा रही है। चारो तरफ अफरा तफरी का माहौल है और कोई भी किसी पर  यकीन करने को तैयार नहीं है। सरकार जो भी प्रयास कर रही है वे सब नाकाम होते जा रहे है। मणिपुर में जो भी हालत है उसके मूल में कुकी समाज का मौजूदा बीरेन सिंह सरकार पर कोई यकीन नहीं होना है। कुकी लोग किसी भी हालत में इस सरकार को देखना नहीं चाहती। कुली समाज साफ़ तौर पर कहता है कि सीएम बीरेन सिंह के इशारे पर ही मणिपुर जल रहा है और कुकियों पर हमले किये जा रहे हैं। इस हमले  में अभी तक 110 लोगों की जाने चली गई है ,करीब चार सौर लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और करीब 60 हजार से ज्यादा लोग विस्थापन के शिकार हुए हैं।         
    इस सबके बीच केंद्र सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब कुकी समुदाय के लोगों ने शांति समिति में शामिल होने से इंकार कर दिया। बता दें कि केंद्र सरकार ने राज्य में शांति-व्यवस्था लाने के लिए राज्यपाल की अध्यक्षता में 51 सदस्यीय शांति समिति का गठन किया था। इस समिति में सीएम एन बीरेन सिंह और विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधियों समेत प्रबुद्ध वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है। जिसके बाद उम्मीद जताई जाने लगी थी की मणिपुर में शांति के लिए उठाया गया यह कदम कारगर साबित हो सकता है। लेकिन अब खबर आ रही है कुकी जनजाति के अधिकतर प्रतिनिधियों ने इस शांति समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया है।           
 समिति में शामिल होने से इनकार करने वाले कुकी जनजाति के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पैनल में सीएम एन बीरेन सिंह और उनके समर्थकों को भी शामिल किया गया है, इसलिए वह इस शांति समिति का बायकॉट करेंगे, बीरेन सिंह ने राज्य में शांति व्यवस्था सुधरे इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।कुकी प्रतिनिधियों का ये भी कहना है कि उन्हें शांति समिति में शामिल करने से पहले उनसे इस बारे में नहीं पूछा गया था।कुछ नेताओं ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा की केंद्र को को बात-चित के लिए सहायक और सरल परिस्थितियां बनानी चाहिए।
               केंद्र सरकार द्वारा गठित शांति समिति में सक्रिय नागरिक समूह कोकोमी को भी शामिल किया गया है। कुकी जनजाति के लोगों का आरोप है कि कोकोमी समूह ने कुकी लोगों के खिलाफ युद्ध का माहौल बना रखा है। ऐसे में जब हिंसा जारी है तो हम मणिपुर सरकार के साथ बातचीत नहीं कर सकते। इस समिति से सरकार को सबसे पहले कोकोमी समूह को हटाये, तब जाकर ही कुकी समुदाय के लोग इस समिति में भाग लेंगे।
          बता दें कि, अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च के आयोजन के बाद पहली बार 3 मई को झड़पें हुई थीं। मेइती समुदाय मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। जनजातीय नागा और कुकी जनसंख्या का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं। राज्य में शांति बहाल करने के लिए करीब 10,000 सेना और असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है।लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है, जिस कारण आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

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