बीरेंद्र कुमार झा
उड़ीसा के बालासोर में तीन ट्रेनों की आपस में हुई भयंकर भिड़ंत के इतने दिन बाद भी हादसे के जख्म भी हरे हैं। 82 शवों की पहचान होना अभी भी बांकी है।इस बीच बहनागा बाजार रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि हादसे वाली जगह पर अभी भी कई सब हो सकते हैं, क्योंकि उस जगह से काफी तेज दुर्गंध आ रही है स्थानीय लोगों की शिकायत पर रेलवे ने राज्य सरकार की मदद से एक बार फिर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद रेलवे ने इस बारे में बयान जारी किया है। रेलवे के अधिकारी ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि दुगंध की वजह डेड बॉडी नहीं कुछ और है।
हादसे वाली जगह पर तेज दुर्गंध की वजह
पूर्व रेलवे के सीपीआरओ आदित्य कुमार चौधरी ने मामले में एक बयान जारी किया और कहा कि तेज बदबू, मानव शरीर से नहीं बल्कि सड़े हुए अंडों की वजह से आ रही है।उन्होंने उन अटकलों पर भी विराम लगा दिया कि हादसे वाली जगह पर अभी भी शव पड़े हुए हैं।
एनडीआरएफ से शवों के न होने को लेकर मिल चुका है साइट क्लीयरेंस
अमित कुमार चौधरी ने बताया कि स्थानीय लोगों की शिकायत पर रेलवे ने एनडीआरएफ की टीम से फिर से घटनास्थल का जांच कराया गया। इस जांच में यह पाया गया कि स्टेशन से आ रही दुर्गंध की वजह सड़े हुए अंडे है ,न कि मानव के मृत शरीर। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर शवों के नहीं होने को लेकर रेलवे को दो बार एनडीआरएफ की तरफ से साइट क्लीयरेंस पहले ही मिल चुका था। उन्होंने बताया कि दरशल घटना के दौरान यशवंतपुर हावड़ा एक्सप्रेस में लगभग 3 टन अंडे ले जाए जा रहे थे। इन ट्रेनों की हुई भिड़ंत में यह सारे अंडे फूट गए जो अब सड़कर दुर्गंध फैला रहे हैं।
गौरतलब है कि 2 जून को बालासोर में हुई हाल के दिनों में देश की सबसे घातक रेल दुर्घटनाओं में से एक इस रेल दुर्घटना में 288 लोगों की मौत हो गई थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस पहले खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, जिसके उसके अधिकांश डिब्बे पटरी से उतर गए। उनमें से कुछ डिब्बे बेंगलुरु हावड़ा एक्सप्रेस के डिब्बों पर गिर गए जी उस समय वहां से गुजर रही थी बालासोर में हुए भयानक ट्रेन हादसे में 1200 से अधिक लोग घायल हुए थे ।

