बीरेंद्र कुमार झा
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने घोषणा की है कि भारत ने सूरीनाम में मूल भारतीय प्रवासियों की ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड के लिए पात्रता मानदंड को चौथी पीढ़ी से छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला किया है, जो 150 साल पुराने द्विपक्षीय संबंधों में उनके महत्व को दर्शाता है।
1873 को भारत से चलकर पहला जहाज पहुंचा था सूरीनाम की राजधानी परमारिबो
भारत ने विदेशों में बसे और वहां की नागरिकता ले चुके भारतीय लोगों के लिए ओसीआई कार्ड की सुविधा प्रदान की है। गौरतलब है कि 452 भारतीय मजदूरों को लेकर 5 जून 18 77 को पहला जहाज ‘ लल्ला रुख’ सूरीनाम की राजधानी पारामारीबो पहुंचा था। इन मजदूरों में से ज्यादातर मजदूर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले थे।
ओसीआई कार्ड भारत के साथ 150 साल पुराने संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी
द्रोपदी मुर्मू ने कहा कि आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मुझे इस मंच पर यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मेरी सरकार ने ओसीआई कार्ड के लिए पात्रता मानदंड को चौथी पीढ़ी से छठी पीढ़ी तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि ओसीआई कार्ड को भारत के साथ उनके 150 साल पुराने संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया।
पांचवी और बाद की पीढ़ियां ओसीआई सुविधा से थी वंचित
इससे पहले ओसीआई सुविधा भारत से सुरीनाम पहुंचे समुदाय के मूल पूर्वजों की केवल 4 पीढ़ियों तक के लिए ही थी। इसके परिणाम स्वरूप पांचवी और बाद की पीढ़ियों से संबंधित समुदाय के कई युवा सदस्य इस लाभ से वंचित थे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुरीनाम के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित
सुरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोषी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू को सूरीनाम के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार’ ग्रैंड ऑर्डर ऑफ द चैन ऑफ़ द येलो स्टार’ से सम्मानित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रविवार को प्रणाम पहुंची थी। पिछले साल जुलाई में राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली सूरीनाम यात्रा है।
भारत एकजुटता और श्रद्धा के साथ परिणाम के साथ खड़ा है
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि विशाल भौगोलिक दूरियों, विभिन्न समय क्षेत्रों और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद भारतीय प्रवासी हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे समय में जब सूरीनाम अपने पूर्वजों की विरासत और भारत के साथ अपने संबंधों का जश्न मना रहा है, भारत एकजुटता और श्रद्धा के साथ सूरीनाम के साथ खड़ा है।

