कर्नाटक से सबक लेकर बीजेपी मध्य प्रदेश में 75 साल की उम्र सीमा को लागू नहीं करेगी !

0
110


अखिलेश अखिल 

कर्नाटक चुनाव ने बीजेपी को बड़ी शिक्षा दी है। बीजेपी को यह भी बता दिया है कि कुछ  राज्यों के फॉर्मूले सभी राज्यों में नहीं चल सकते। बीजेपी को यह पता चल गया है कि अब पार्टी से जुड़े लोग कोई समर्पित नेता नहीं  है जिन्हे आदेश के जरिये हांका जाए। बीजेपी यह भी मान गई है कि जब राजनीति एक जुआ है और जुए के खेल में कुछ भी संभव है तो भला कोई नेता ही समर्पण की राह पर क्यों चले ? बीजेपी को यह भी पता चल गया है कि उत्तराखंड ,गुजरात और कर्नाटक का मॉडल मध्यप्रदेश में लागू नहीं किया जा सकता। बीजेपी यह भी मान रही है कि अगर नाराज लोगों को नहीं मनाया गया तो खेल खराब हो सकता है और मध्यप्रदेश भी कर्नाटक की तरह से हाथ से निकल सकता है। और ऐसा हुआ तो अगले लोकसभा चुनाव में फिर बचेगा क्या ? मध्यप्रदेश संघ और बीजेपी का गढ़ माना जाता है लेकिन जिस तरह से कांग्रेस की तैयारी है और बीजेपी में मतभेद की कहानी दिख रही है उससे बीजेपी काफी डर गई है और कोई भी बड़ा बदलाव करने से परहेज कर रही है।        
 कहा जा रहा था कि चुनाव से पहले सीएम शिवराज सिंह की विदाई बीजेपी कर सकती है। लेकिन खबर ये है कि अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा। कर्नाटक में जो कुछ भी हुआ उसमे नेतृत्व बदलने की कहानी भी हार का एक प्रमुख कारण माना गया है। बीजेपी मान रही है कि अगर येदियुरप्पा को नहीं हटाया जाता तो संभव है कि बीजेपी की हार इतनी बुरी नही होती। लेकिन ज होना था वह तो हो गया है। अब आगे सचेत रहने की बारी है।    
तो खबर ये हैं कि बीजेपी  मध्य प्रदेश में कर्नाटक, गुजरात या उत्तराखंड का फॉर्मूला नहीं लागू करने जा रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी न तो मुख्यमंत्री बदलने जा रही है और न मंत्रियों और विधायकों की टिकट काटने जा रही है। हालांकि कुछ विधायकों की टिकट कटेगी लेकिन ज्यादातर की टिकट काट कर एंटी इनकम्बेंसी दूर करने का फार्मूला नहीं लागू होगा। उलटे कर्नाटक से सबक लेकर भाजपा नाराज नेताओं को मनाने में लगी है और जिन लोगों को पार्टी से निलंबित किया गया है उन सबकी वापसी कराई जा रही है। इतना ही नहीं पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ टिप्पणी करने या आंतरिक मतभेद को बढ़ाने वाला काम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई भी हो रही है।
          बीजेपी ने ग्वालियर, रीवा और भिंड के चार ऐसे नेताओं की पार्टी में वापसी कराई है, जिनको पिछले साल निलंबित किया गया था। ये सब जिला स्तर के नेता हैं लेकिन भाजपा उनको गंभीरता से ले रही है। इसी तरह पार्टी के एक वरिष्ठ नेता पर टिप्पणी करने वाले सुशील तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस बीच पार्टी के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने संकेत दिया है कि 75 साल की अघोषित उम्र सीमा को मध्य प्रदेश में नहीं लागू किया जाएगा। यानी इस आधार पर पार्टी किसी की टिकट नहीं काटेगी की वह 75 साल का हो गया है। उन्होंने कहा है कि टिकट देने का एकमात्र पैमाना चुनाव जीतने की क्षमता है। अगर कोई नेता चुनाव जीतने की स्थिति में होगा तो उसकी टिकट नहीं कटेगी। पिछली बार कई लोगों की टिकट कटी थी। इस बार भी टिकट कटने की आशंका में गौरीशंकर बिसेन, कुसुम मेहदेले जैसे कई लोग पहले से सक्रिय हो गए थे। लेकिन पार्टी ने सबको भरोसा दिलाया है कि उम्र के आधार पर टिकट नहीं कटेगी। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here