बीरेंद्र कुमार झा
आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत पार्टी के अन्य नेता गुरुवार की देर शाम रांची पहुंचे।बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत हुआ। आज 2 जून को उनकी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात होनी है। इस मुलाकात में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के लिए लाए गए केंद्रीय अध्यादेश के विरोध को लेकर सहयोग की मांग की जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से मिलकर सहयोग की मांग की थी।
राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह मुलाकात
आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्रीय अध्यादेश के विरोध के नाम पर इस समय देश के विभिन्न प्रांतों की गैर बीजेपी सरकार से अपना समर्थन मांगने में जुटी हुई है। इसके बहाने वह बीजेपी पर भी दबाव बना रही हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी अपना दमखम दिखा रही है, ताकि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव में गैर बीजेपी सरकार बने तो यह प्रधानमंत्री पद के लिए अपना दावा पेश कर सके। इस सिलसिले में आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान वे अध्यादेश का विरोध के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का समर्थन मांगेंगे साथ ही साथ 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को लेकर भी चर्चा कर सकते हैं।
केंद्रीय अध्यादेश का तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करेंगे विरोध
रांची आने से पूर्व दिल्ली के मुख्यमंत्री और आपके संयोजक अरविंद केजरीवाल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से मिलने चेन्नई पहुंचे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय अध्यादेश के विरोध को लेकर एम के स्टालिन से इस मामले की लेकर सहयोग की मांग की थी। इस मौके पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा था कि केंद्र सरकार आम आदमी पार्टी के लिए संकट उत्पन्न कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र विपक्ष की सरकार को स्वतंत्र रूप से काम करने से रोक रहा है। स्टालिन ने केंद्र पर गैर बीजेपी शासित राज्यों में संकट उत्पन्न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि डीएमके राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के लिए लाए गए केंद्रीय अध्यादेश का कड़ा विरोध करेगी।
पंजाब सरकार भी इसी तरह की समस्या से जूझ रही है
इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि डीएमके सरकार को एक ऐसे राज्यपाल के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ी,जिसने न केवल विधानसभा में विधायकों का अनुमोदन करने से परहेज किया बल्कि राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण को भी नहीं पढ़ा। उन्होंने कहा कि उनकी पंजाब की सरकार भी इस तरह की समस्याओं का सामना कर रही है। उन्हें बजट सत्र बुलाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा क्योंकि राज्यपाल इसकी अनुमति नहीं दे रहे थे।

