तो क्या मणिपुर राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ रहा है ?

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न्यूज डेस्क
मणिपुर की हालत कैसी है इसके बारे में यही कुछ कहा जा सकता है कि बिगड़ती हालत को देखते हुए प्रदेश में अब तक अर्धसैनिक बलों की 14 कंपनियां तैनात की जा चुकी हैं। 3 मई को एटीएसयूएम एकजुटता मार्च के बाद 4 मई को हिंसक प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने चर्चों, स्कूलों, घरों, वाहनों और कई संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया था। इसके बाद पूरे मणिपुर में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। अभी भी हालत में कोई सुधार नहीं है लेकिन सेना के उतरने के बाद हिंसक घटनाएं कम हुई है । हालांकि सच यही है कि अभी भी दो गुटों के बीच भारी तनाव बरकरार है । कहा जा रहा है कि जिस तरह से मेताई समुदाय और नागा , कुकी समाज के लोग अचानक उग्र हुए हैं अगर मामले को ठीक से नहीं सुलझाया गया तो आने वाला कल और भी खतरनाक हो सकता है।

इधर खबर ये भी मिल रही है कि सीआरपीएफ के एक कोबरा कमांडो और इंफाल में तैनात आयकर विभाग के एक अधिकारी की भी जान चली गई है। राजधानी इंफाल में उपद्रवी भीड़ ने आयकर विभाग में तैनात भारतीय राजस्व सेवा के एक अधिकारी की घर से बाहर खींचकर हत्या कर दी। इंडियन रेवेन्यू सर्विस एसोसिएशन ने ट्वीट कर यह सूचना दी है। मिनथांग हाओकिप इंफाल में टैक्स असिस्टेंट के पद पर तैनात थे।

वहीं, चुराचंदपुर जिले में सीआरपीएफ के एक कोबरा कमांडो की हत्या की भी खबर सामने आई है। चुराचंदपुर जिले के निवासी चोंखोलेन हाओकिप सीआरपीएफ की डेल्टा कंपनी की 204 कोबरा बटालियन में तैनात थे। कोबरा कमांडो हाओकिप अभी कुछ दिन पहले ही छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे।

भारतीय सेना मुताबिक, करीब 13,000 नागरिकों को बचाने में वह कामयाब रहे हैं, जो वर्तमान में सैन्य चौकियों के आश्रय स्थलों और शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं। इससे पहले 7300 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था, जो कि प्रदर्शन के दौरान तनाव वाले इलाकों में फंसे थे।

अनुच्छेद 355 क्या है?

बता दें कि मणिपुर में अनुच्छेद 355 लागू किया गया है, जिससे केंद्र को स्थिति को नियंत्रण में लाने और लोगों के जान-माल की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की अनुमति मिल गई है। डीजीपी ने कहा कि कुछ बदमाशों ने बिष्णुपुर जिले के एक थाने से हथियार लूट लिए और उन्होंने उनसे हथियार और गोला-बारूद वापस करने का आग्रह किया, जिसमें विफल रहने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

अनुच्छेद 355 राष्ट्रपति शासन नहीं है और न ही आपातकाल है। इस अनुच्छेद में मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर केंद्र सरकार किसी भी राज्य की सुरक्षा अपने हाथ में ले लेती है ताकि उस राज्य में आंतरिक और बाहरी ताकतों से उसकी सुरक्षा की जा सके। अनुच्छेद 355 संविधान में निहित आपातकालीन प्रावधानों का एक हिस्सा है जो केंद्र को आंतरिक गड़बड़ी और बाहरी आक्रमण के खिलाफ राज्य की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देता है। अगर फिर भी मणिपुर के हालत नही सुधरते है तो वहां राष्ट्रपति शासन की व्यवस्था की जा सकती है।

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