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मेघालय की राजनीति : सत्तारूढ़ एनपीपी की सहयोगी पीडीएफ का आज एनपीपी में विलय होगा !

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न्यूज़  डेस्क 

 मेघालय की सरकार में शामिल दो सीटों वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी पीडीएफ आज सरकार की अगुवाई करने वाली पार्टी नेशनल पीपुल्स फ्रंट यानी एनपीपी में विलय कर जाएगी। इस बात की घोषणा पीडीएफ ने पहले ही की थी। आज के विलय कार्यक्रम को  देखते हुए कहा जा रहा है कि यह विलय प्रदेश के  लिए बेहतर होने जा रहा है। पीडीएफ को पिछले चुनाव में दो सीटों पर जीत हाशिल हुई थी। पीडीएफ भी सरकार में शामिल है।      
जानकार मान रहे हैं कि पीडीएफ के एनपीपी में विलय के बाद एनपीपी की ताकत और भी बढ़ जाएगी। बता दें कि एनपीपी प्रमुख कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री हैं। बीते चुनाव में एनपीपी को बड़ी जीत हाशिल हुई थी।  26 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। मेघालय में 60 सीटों वाली विधान सभा है।        
   दो विधायकों के साथ पीडीएफ के विलय के बाद, 60 सदस्यीय विधानसभा में एनपीपी की संख्या बढ़कर 28 हो जाएगी, जिसकी वर्तमान ताकत 59 है क्योंकि मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में सोहांग विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव 10 मई को होगा।
           पीडीएफ के कार्यकारी अध्यक्ष बंतेइदोर लिंगदोह ने कहा कि एनपीपी के साथ विलय का निर्णय पार्टी की आम परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसकी अध्यक्षता इसके अध्यक्ष गेविन एम. माइलिम  ने की, जो दो विधायकों में से एक हैं।माइलिम  ने कहा कि कई अन्य दलों ने विलय के लिए उनसे संपर्क किया, लेकिन पीडीएफ के अधिकांश नेता और सदस्य एनपीपी की विचारधारा और पार्टी कार्यक्रम को देखते हुए विलय के इच्छुक थे। एनपीपी मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस यानि एमडीए सरकार की प्रमुख पार्टी है।
             पीडीएफ अब एमडीए सरकार का एक घटक है, जिसमें दो निर्दलीय के अलावा यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (11 विधायक), भाजपा और हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दो-दो सदस्य शामिल हैं।
            बता दें कि पीडीएफ का गठन 2018 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले 2017 में हुआ था। एनपीपी, पीडीएफ, यूडीपी, बीजेपी और एचएसपीडीपी ने 27 फरवरी को एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। लेकिन  चुनाव परिणाम के बाद सब एक हो गए। इस खेल को लेकर बीजेपी की काफी आलोचना भी की गई थी। बीजेपी ने ही चुनाव से पहले अलग लड़ने की बट कही थी। चुनाव के दौरान  एनपीपी को  सबसे भ्रष्ट पार्टी कहा था। अमित शाह ने कोनराड संगमा को भी सबसे भ्रष्ट नेता कहा था और कहा था कि बीजेपी की सरकार बनने के बाद संगमा की जांच होगी ,लेकिन चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी संगमा के पास पहुँच गई और साथ मिलकर सरकार बनाने का ऐलान किया। 

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